CA Dhananjay Ojha ji द्वारा बाबा रामदेव जी को अंतर्राष्ट्रीय गौ महोत्सव में आमंत्रण
🌿 CA Dhananjay Ojha ji द्वारा बाबा रामदेव जी को अंतर्राष्ट्रीय गौ महोत्सव में आमंत्रण
वाराणसी के पावन नगरी काशी से एक अत्यंत प्रेरणादायक पहल — “अंतर्राष्ट्रीय गौ महोत्सव (DhenuDhan Global Summit 2026)” की तैयारियाँ पूरे उत्साह और समर्पण के साथ चल रही हैं। इस आयोजन के मुख्य संयोजक CA Dhananjay Ojha जी ने योग गुरु बाबा रामदेव जी को विशेष आमंत्रण भेजा है ताकि वे इस ऐतिहासिक आयोजन में पधारकर अपने विचारों से देश-विदेश के गौ-प्रेमियों, योग साधकों और ग्रामीण उद्यमियों को मार्गदर्शन प्रदान करें।
🌸 आयोजन का उद्देश्य
यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि “गौ-आधारित अर्थव्यवस्था, योग एवं आयुर्वेद” को विश्व स्तर पर स्थापित करने का एक आंदोलन है।
इस आयोजन का उद्देश्य है —
- भारत की प्राचीन गौ-संस्कृति को पुनर्जीवित करना,
- पंचगव्य आधारित औषधीय और जैविक नवाचारों को प्रोत्साहित करना,
- और युवा उद्यमियों को गौ-उद्योग एवं ग्रामीण विकास से जोड़ना।
CA Dhananjay Ojha जी के अनुसार —
“योग, गौ और ग्राम — इन तीनों का संयोजन ही भारत की सच्ची आत्मा है। इसलिए हमने बाबा रामदेव जी को आमंत्रित किया है ताकि वे योग और गौ-चिकित्सा के वैज्ञानिक सम्बंध पर अपना प्रेरक विचार साझा कर सकें।”
🕉️ बाबा रामदेव जी की संभावित भूमिका
बाबा रामदेव जी इस महोत्सव में मुख्य अतिथि या विशिष्ट वक्ता के रूप में भाग ले सकते हैं।
उनका प्रस्तावित सत्र होगा —
“गौ आधारित जीवन शैली में योग और आयुर्वेद की भूमिका”,
जिससे सहभागी जान सकेंगे कि कैसे योग से मानव और गौ-स्वास्थ्य दोनों का संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
📍 आयोजन की मुख्य झलकियाँ
- स्थान: शताब्दी कृषि भवन, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी
- तिथि: 14-16 मार्च, 2026
- मुख्य आकर्षण:
- गौ-संवर्धन, गौ-चिकित्सा और पंचगव्य पर विशेष सत्र
- योग एवं ध्यान प्रशिक्षण कार्यशालाएँ
- स्टार्टअप एक्सपो और ग्रामीण उद्यमिता से जुड़ी प्रदर्शनियाँ
- 80 से अधिक देशी गौ प्रजातियों का प्रदर्शन
- गंगा आरती और सांस्कृतिक संध्या
🌺 निष्कर्ष
CA Dhananjay Ojha जी का यह आमंत्रण न केवल एक औपचारिकता है, बल्कि एक संस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत है।
बाबा रामदेव जी की उपस्थिति से यह आयोजन और भी महान व प्रभावशाली बन जाएगा।
यह केवल किसान या गौ-संरक्षक का महोत्सव नहीं होगा, बल्कि भारत की “गौ-आधारित आध्यात्मिक अर्थव्यवस्था” की नवीन दिशा का संदेश देने वाला विश्व-स्तरीय मंच बनेगा।